• Lalita Tripathi

बनारस के चटपटे ज़ायके



दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक काशी की बात ही बात ही निराली है, रूमानियत के साथ अक्खड़पन बनारस का मिज़ाज़ है| प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन 1897 में लिखा था "बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है” ("Benares is older than history, older than tradition, older even than legend, and looks twice as old as all of them put together”)

संस्कृति - सभ्यता और विशाल इतिहास को समेटे काशी को ना केवल गलियों और मंदिरों का शहर कहा जा सकता है बल्कि ये शहर है दर्शन का, ज्ञान का, शिक्षा का और नायाब स्वाद का| बाबा विश्वनाथ की नगरी कही जाने वाली काशी के ज़ायकों का मुकाबला नहीं किया जा सकता। यहां हर गली हर नुक्कड़ में बेहतरीन जायकों की खुशबू है, और यकीन मानिए चाहे आप यहां के किसी भी बड़े रेस्टोरेंट में चलें जाएं या छोटी सी दुकान पर, आपको हर किसी में बनारस के लाज़वाब स्वाद मिलेगा। काशी के जायके में जहां मिठास घुली है तो वहीं पर इसका अंदाज़ चटपटा भी खूब है। तो चलिए हम आपको बताते हैं बनारस के वो चटपटे जायके जिसे चखकर यक़ीनन आपके मुंह में पानी आ जायेगा|


कचौड़ी - सब्जी



सुबहे बनारस की शुरुआत होती है कचौड़ी – सब्जी और साथ में गरमा-गरम मुँह में घुलने वाली जलेबियों के साथ| बनारसी कचौड़ियों की अगर हम बात करें तो यहाँ उड़द की बनी बेड़मी पूड़ी को ही कचौड़ी कहते हैं|

इसके साथ मिलने वाली आलू – कोहडे और चने की गरम मसाले वाली सब्जी इतनी लाजवाब होती है कि आप सब्जी ही दो से तीन बार मांगने पर मजबूर हो जाएंगे। कचौड़ी - सब्जी की दुकान आपको यहाँ की हर गली - मोहल्ले में मिल जाएगी जाएगी|

मणिकर्णिका घाट के बगल में एक सकरी गली का नाम है कचौरी गली, इस से आपको बनारस के इस ख़ास नाश्ते की लोकप्रियता का अंदाज़ा लग जाता है| इस गली के बगल में श्मशान घाट होने की वजह से यहां कचौड़ी-सब्जी 24 घंटे मिलती है| अगर हम बात करें कचौरी के साथ मिलने वाली सब्जी के ज़ायके की तो ये आपको बनारस के हर दुकान पर अलग मिलेगी और यही ख़ास बात हर किसी को एक दुसरे से अलग बनाता है, चाहे वो कचौड़ी गली की दुकानें हो, लंका पर चाची की दुकान हो, ठठेरी बाज़ार में स्थित राम भण्डार की कचौड़ी- जलेबी हो या फिर गोदौलिया, मैदागिन, विश्वेश्वरगंज, सोनारपुरा या चेतगंज की दुकाने|


टमाटर चाट



बनारस आए और बिना टमाटर चाट खाए गए तो यकीन मानिए पछताएंगे जरुर। क्योंकि बनारस का ये वो लजीज चटपटा जायका है जो लाजवाब है। ये एक अलग तरह का चाट है जो टमाटर के साथ बनाया जाता है, और इस अनोखा चाट इस चाट की एक और ख़ासियत ये है की ये बनारस का अपना ज़ायका है| टमाटर की टैंगीनेस या खटास के साथ चटपटे मसालों और हल्की मिठास वाली यह चाट खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है|

इस चाट को बनाने के लिए टमाटर के अलावा इसमें उबले हुए आलू, हिंग, अदरक, हरी मिर्च और पारंपरिक मसालों को मिला कर देसी घी में पकाया जाता है। टमाटर चाट को छोटे आकार के कुरकुरे नमक पारे के साथ कुल्हड़ में परोसा जाता है, इसी वजह से इसे कुल्हड़ चाट भी कहा जाता है|

आपको इसका ज़ायका बनारस के गोदौलिया क्षेत्र में स्थित काशी चाट भंडार या रामपुर -लक्सा रोड पर स्थित दीना चाट भंडार में मिलेगा| यहाँ आप देसी घी से बने विभिन प्रकार के चाट,पानी पूरी या गोलगप्पे,दही गोलगप्पे ,आलू टिक्की, टमाटर चाट, पापड़ी चाट,चूड़ा मटर के साथ – साथ आप गुलाब जामुन का भी लुफ्त उठा सकते हैं|


चूड़ा - मटर




बनारसी चूड़ा -मटर का स्वाद भी निराला है, ये अन्य जगह मिलने वाले पोहे से काफ़ी अलग है| बनारस में मिलने वाले चूड़ा -मटर या मटर पोहे को देसी घी में बनाया जाता है जो उसके जायके को दोगुना करता है, और एक बात इसको ख़ास बनाती है की चिवड़े को पानी में नहीं बल्कि दूध और क्रीम में भिगोया जाता है| हालाकि चूड़ा – मटर सर्दियों का ही जायका है। ठण्ड शुरू होते ही आपको खाने पीने दुकान या स्टाल पर यहां का स्पेशल चुडा मटर आसानी से दिख जायेगा, यहां तक कि ये घर घर का नाश्ता होता है।

अगर आप सर्दियों में कभी बनारस आये तो गोदोलिया में स्थित काशी चाट भंडार के चूड़ा -मटर चाट को खाना ना भूले| यहाँ पर मिलने वाले चूड़ा -मटर चाट की ख़ासियत है की चिवड़े या पोहे को चाट के रूप में सर्व किया जाता है| बहुत ही हल्की फुल्की सामग्रियों के साथ बनायी गयी यह चाट एक बनारस का फ़ास्ट फ़ूड होते हुए भी बिलकुल हल्की और सुपाच्य होती है| इस बनारसी ज़ायके को बनाने के लिए भीगे हुए पोहे या चिवड़े को मटर के साथ तवे पर घी में भूना जाता है, और इसे काजू-किशकिश, पुदीने की चटनी, सोंठ की चटनी, कुरकुरे बारीक नमकपारे और हरा धनिया डाल पत्तल में कर परोसा जाता है| गरमा-गर्म कुल्हड़ चाय के साथ काशी के इस बेहतरीन ज़ायके के यक़ीनन आप मुरीद हो जायेंगे|


बाटी और चोखा



बिहार के इस ख़ास व्यंजन का बनारस में भी ख़ास स्थान है, इसका अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं की वाराणसी में लगने वाले “लोटा भंटा मेला” में बाटी-चोखा और खीर का भोग बाबा भोलेनाथ को लगता है| वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के रामेश्वर में लगने वाले आस्था के प्रतीक लोटा भंटा मेला को सदियों पुराना त्रेतायुग से माना जाता है। बाटी चोखा बनारस का काफी लोकप्रिय जायका है, बैगन, आलू, टमाटर भूनने के बाद इससे बना चोखा और घी से लबालब चने के सत्तू से भरी बाटी का स्वाद हर बनारसी की जुबां में बसता है। बनारस की हर एक गली में आपको ये लाज़वाब ज़ायका चखने को मिल जाएगा।


बनारसी गोलगप्पे



वैसे तो गोलगप्पे हर शहर में मिलते हैं लेकिन बनारस में गोलगप्पे का जायका बिल्कुल अलग ही होता है। यहां आलू मटर के मसाले भरे गोलगप्पे मिलते हैं। दही चटनी वाले गोलगप्पे के मसाले कमाल के होते हैं। साथ ही पानी तो बस आपके मुंह में पानी ही ला देगा। बनारस के गोलगप्पे में लोग ज्यादातर आटे वाले गोलगप्पे ही खाते हैं। बनारस के लगभग हर चौराहे पर गोलगप्पो की रेहड़ी या दुकानं मिल जाएगी और सभी का स्वाद बेहतरीन होता है।


दही- वडे



बनारसी गोलगप्पो के साथ यहां के दही-वडे भी काफी लोकप्रिय है| मुँह में घुलने घुल जाने वाले चटपटे दही-वडे के स्वाद को आप कभी नहीं भूल पाएंगे। दही- वडे को लाल मिर्च ,काला नमक, जीरा पाउडर एवं चटनी के साथ परोसा जाता है जो वाकई लाजवाब होता है| इसे मीठे एवं खट्टे के एक सही मिश्रण के साथ बनाया जाता है।

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